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Chatgpt Artificial Intelligence एक खतरा है! वैज्ञानिक का मानना है ये हमारे पर्यावरण के लिए एक संकेत है.

Chatgpt Artificial intelligence यानी AI पर आधारित प्रोग्राम दुनियाभर में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है । Chatgpt की मदद से लोग अपने सवाल का जवाब आसानी से ढूंढ सकते है और यह काफी फायदे मंद साबित हुआ है। लेकिन कुछ सीज इस्तेमाल करने पर कुछ देना भी पढ़ता है। Chatgpt इस्तेमाल के लिए बोहोत सारा पानी की जरूरत होता है। ये एकबार में ही काफी सारा पानी पी जाते है ।

 

हमलोग इसके लिए बोहोत खुशी मना रहे है की Chatbot को मदद से हम अपने कामों को जल्दी और आसानी से कर लेते है। लेकिन वैज्ञानिक को इसका उल्टा परेसानियो से जूझना पढ़ रहा है। Chatgpt ने लोगों की जिंदगी असान जरूर की है लेकिन इसके लिए एनर्जी की खटपट बहुत ज्यादा है। इसपर हुयी एक स्टडी में यह बात सामने आयी AI chatbot के इस्तेमाल में बेतहासा पानी खर्च होता है। अकेले Gpt-3 के लिए लगभग 7 लाख लीटर पानी की खपत होती है यानी एकबार की ट्रेनिंग में Gpt 7 लाख लीटर पानी पी जाता है।

 

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AI Chatbot की ट्रेनिंग के लिए बड़े पैमाने पर सर्वर फॉर्म की जरूरत होती है, इन्हीं डाटा सेंटर को ठंडा रखने के लिए पानी ka इस्तेमाल होता है। 20-25 सवालों का जवाब देने के लिए लगभग 500 मिलीलीटर पानी लगता है। Researchers को डर है कि ऐसा हाल रहा तो पानी संकट पैदा हो सकता है; और जाहिर है पर्यावरण पर अचार भी बुरा होगा , सूखे का भी सामना करना पढ़ सकता है।

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